देश को जल्द मिलने वाला है नया संसद भवन, प्रधानमंत्री को भी मिल जाएगा नया आवास
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत देश को मार्च 2022 तक में नया संसद भवन मिल जाएगा।

देश को अगले दो सालों में नया संसद भवन मिल जाएगा।
देश को बहुत जल्द नया संसद भवन मिलने वाला है, इसी के साथ केन्द्रीय सचिवालय और नए पीएम आवास व पीएमओ का भी निर्माण किया जाना है और यह सब पूरा होगा सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत।
देश का संसद भवन ही वह इमारत है जिसके भीतर बैठे सांसद देश का रोडमैप तैयार करते हैं, लेकिन यह इमारत अब पुरानी हो चुकी है। साल 1921 में सांसद भवन का निर्माण शुरू हुआ, जबकि साल 1927 में यह इमारत बनकर तैयार हुई। इस तरह से कुछ सालों बाद ही इस इमारत को बने हुए 100 वर्ष हो जाएंगे, ऐसे में सरकार ने अब भविष्य की जरूरतों को देखते इस क्षेत्र को पुनर्विकसित करने की ओर कदम बढ़ाया है।
क्या है सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट?

(चित्र: hindustan times)
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत देश के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को फिर से विकसित किया जाएगा। एडविन लुटियन्स द्वारा डिजाइन किए गए इस क्षेत्र के भीतर ही संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और केन्द्रीय सचिवालय जैसी महत्वपूर्ण इमारतें आती हैं।
सेंट्रल विस्टा के तहत नए संसद भवन का निर्माण भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। नए संसद भवन को 1 हज़ार से अधिक सांसदों के बैठने के हिसाब से तैयार किया जा रहा है, इसी के साथ इन सांसदों व इनके स्टाफ के लिए इस भवन में अलग-अलग कमरों की भी व्यवस्था की जाएगी। मौजूदा संसद भवन एक ऐतिहासिक इमारत है, ऐसे में उस भवन को एक धरोहर के रूप में विकसित किया जा सकता है, हालांकि भवन के अंदरूनी ढांचे में बदलाव जरूर किए जा सकते हैं।
नए संसद भवन को अगले 250 सालों के हिसाब से डेवलप किया जा रहा है, वहीं पुराने संसद भवन में जो कमियाँ मौजूद थीं, उसे इस नए भवन में पूरा कर लिया जाएगा। नए संसद भवन के निर्माण की डेडलाइन मार्च 2022 तक रखी गई है, इसका मतलब यह है कि परियोजना अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ी तो देश को अगले 2 सालों में नया संसद भवन मिल जाएगा। इस काम की ज़िम्मेदारी एचसीपी डिजाइन कंपनी को दी गई है, यही वह कंपनी है जिसने साबरमती रिवरफ्रंट और गांधीनगर सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास का काम किया था।

नए संसद भवन का प्रतीकात्मक चित्र (क्रेडिट: hindustantimes)
इस परियोजना के तहत प्रधानमंत्री आवास को साउथ ब्लॉक के पीछे स्थापित किया जाएगा, जबकि पीएमओ को साउथ ब्लॉक के पीछे साउथ-ईस्ट कॉर्नर पर बनाया जाएगा, हालांकि इस परियोजना में राष्ट्रपति भवन की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होगा। नॉर्थ ब्लॉक को मेक इन इंडिया से जुड़े म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि साउथ ब्लॉक को आज़ादी के 75 सालों से जुड़े म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा। नेशनल म्यूजियम की वर्तमान बिल्डिंग जिसका निर्माण 1960 में हुआ था, उसे हटा दिया जाएगा।
गौरतलब है कि इस प्लान के तहत बनने वाले किसी भी भवन की ऊंचाई इंडिया गेट से अधिक नहीं होगी। यह सैनिकों के सम्मान में उठाया गया कदम है।
कितनी बड़ी है परियोजना?
देश के नए संसद भवन के निर्माण की यह परियोजना काफी बड़ी है। इस परियोजना की डिजाइन के लिए ही एचसीपी को 229 करोड़ रुपये दिये गए हैं, जबकि इस परियोजना की कुल लागत 12 हज़ार 450 करोड़ रुपये के आस-पास है।
इस परियोजना के तहत होने केन्द्रीय सचिवालय के निर्माण से सरकार को भी फायदा होगा। वर्तमान में कई मंत्रालय ऐसे हैं जिनके कार्यालय दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए हैं और उनके किराए के लिए सरकार को हर महीने करीब 1 हज़ार करोड़ रुपये तक की राशि खर्च करनी पड़ती है।
कहाँ है समस्या?
सेंट्रल विस्टा परियोजना को लेकर अभी कई मसलों पर संशय बरकरार है, जिसमें पेड़ों की कटाई और कुछ इमारतों की स्थिति शामिल है। इस परियोजना को आगे ले जाने में करीब 1 हज़ार पेड़ों की कटाई होने की संभावना है, ऐसे में प्रोजेक्ट शुरू होने के साथ ही सरकार को उस क्षेत्र में नए पेड़ लगाने की व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा।