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एक माह में 5 गोल्ड जीतने वाली ये उड़न परी तो मिल्खा, पीटी उषा से भी तेज निकली

असम के गाँव कांधूलिमारी में धान की खेती करने वाले रणजीत दास ने भी दो साल पहले तक ऐसा नहीं सोचा था कि उनकी सबसे छोटी बेटी हिमा दास इतनी तेज दौड़ेगी कि महान धावक मिल्खा सिंह और पीटी उषा का भी वह रिकार्ड ध्वस्त कर डालेगी लेकिन ये सच है। हिमा ने एक माह में ही पांच गोल्ड जीत लिए हैं।



हिमा दास

एक माह के भीतर पांच स्वर्ण पदक हासिल करने वाली हिमा दास



भारतीय खेल के इतिहास में कभी सुनहले अध्याय जोड़ने वाले मिल्खा सिंह और उड़न परी पीटी उषा का रिकार्ड तोड़ने वाली असमिया हिमा दास विश्व की पहली ऐसी धाविका बन गई हैं, जिन्होंने विश्व स्पर्धा में एक माह के भीतर पांच स्वर्ण पदक हासिल कर लिए हैं। उन्होंने चेक गणराज्य में चार सौ मीटर स्पर्धा में शीर्ष स्थान पर रहते हुए रेस का अंत किया। इससे पहले इसी महीने उन्होंने 02 जुलाई को यूरोप में, 07 जुलाई को कुंटो एथलेटिक्स मीट में, 13 जुलाई को चेक गणराज्य में ही और 17 जुलाई को टाबोर ग्रां प्री में ये गोल्ड मेडल फतह किए। ये वही हिमा हैं, जिन्होंने अभी कुछ दिन पहले ही 17 जुलाई को असम के बाढ़ पीड़ितों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में अपना आधा वेतन दान कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने ट्वीट कर बड़ी कंपनियों से भी असम वासियों की मदद की गुहार लगाई।


आईएएएफ वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली असम की पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हिमा दास का जन्म 09 जनवरी 2000 को नगाँव जिले के कांधूलिमारी गाँव में पिता रणजीत दास, मां जोनाली दास के घर हुआ था। उनके माता पिता चावल की खेती करते हैं। हिमा अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। हिमा पढ़ाई के दिनो में लड़कों के साथ फुटबॉल खेला करती थीं। उस समय उन्हे अपना करियर फुटबॉल में दिख रहा था लेकिन जवाहर नवोदय विद्यालय के टीचर शम्शुल हक की सलाह पर उनकी राह एथलीट की ओर मुड़ गई। शम्शुल हक़ ने सबसे पहले उनकी पहचान नगाँव स्पोर्ट्स एसोसिएशन के गौरी शंकर रॉय से कराई तो जिला प्रतिस्पर्धा में उन्होंने दो स्वर्ण पदक जीत लिए। 


उसी दौरान हिमा पर 'स्पोर्ट्स एंड यूथ वेलफेयर' के निपोन दास की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने हिमा को माता-पिता की सहमति पर उनके गांव से 140 किलोमीटर दूर गुवाहाटी बुला लिया। हिमा को आधुनिक उड़न परी बनाने वाले उनके कोच निपोन दास कहते हैं कि इस लड़की को उन्होंने जब पहली बार जनवरी 2018 में देखा था, वह हवा की तरह दौड़ रही थी। इससे पहले हिमा की उम्र वाली किसी लड़की को उतना तेज दौड़ते हुए नहीं देखा था। उसके बाद उन्होंने गुवाहटी में सरसाजई स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास एक किराए के मकान में रहने की व्यवस्था कराई। उस समय तक असम खेल अकादमी में एथलेटिक्स के लिए अलग विंग नहीं था। निपोन दास की सिफारिश पर पहली बार हिमा के लिए ही अकादमी में एथलेटिक्स विंग भी बना दिया गया।


जैसेकि हर खिलाड़ी को अपने जीवन में हार-जीत के उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ता है, हिमा के साथ भी ऐसा होता रहा है। अप्रैल 2018 में गोल्ड कोस्ट में खेले गए कॉमनवेल्थ खेलों की 400 मीटर की स्पर्धा में हिमा ने 51.32 सेकेंड में छठवाँ स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद 4X400 मीटर स्पर्धा में उन्हे सातवें स्थान पर संतोष करना पड़ा। जब गुवाहाटी में अंतरराज्यीय स्पर्धा हुई तो उन्होंने गोल्ड मेडल जीत लिया। इसके बाद पिछले साल जकार्ता में 18वें एशियन गेम्स में राष्ट्रीय रिकार्ड तोड़ते हुए उनको रजत पदक मिला। उसको बाद से तो इस साल 2019 में उनकी जो सुनहरी दौड़ शुरू हुई, उन्होंने ऐतिहासिक धावक मिल्खा सिंह और उड़न परी पीटी उषा को भी पीछे छोड़ दिया है।